शुक्रवार, 19 मार्च 2010

विचारों के दस्त.


क्या बात है जनाब कई दिनों से दिखाई नहीं पड़े। कहाँ रहते हो? बड़े सुस्त नज़र आ रहे हो।



नहीं कोई बड़ी बात नहीं ..... बस पिछले कुछ दिनों से थोडा दिमाग ख़राब चल रहा है। विचारों के दस्त लगें है।



हैं ?????? विचारों के दस्त ! ये कोन सी नईबीमारी है दोस्त , आजतक नहीं सुनी ?



है , एक बीमारी ये भी है... जो लोग हर समय अनाप-सनाप सोचते रहते हैं...... दिमाग को आराम ही नहीं देते उनको कभी कभी ऐसी बीमारी भी हो जाती है।


अच्छा इसके लक्षण क्या है?


लक्षण क्या बताऊँ ? .... अपने कोई घटना देखि या सुनी तो आपकी खोपड़ी में गुढ़ गुढ़ सी होने लगेगी। दिमाग ऐठने लगेगा और विचार रोके नहीं रुकेंगे, बस सर पकड़ो और भागो टेबल की तरफ और लगा दो अपने विचारों का ढेर।

च च च ....... यह बीमारी लगी कैसे तुम्हें?

क्या बताऊँ यार .... कुछ कच्चे पक्के ब्लॉग देखे तब से ही दिमाग ख़राब हुआ है और बस.......... पता नहीं कब के जमे हुए बासी विचार निकले जा रहे हैं, एक के बाद एक ...... धडा धड....... कुछ तो बाहर ही फैल जाते , जगह पर ही नहीं होते। ये मेरे दोस्त का लगाया हुआ रोग है। पहले सिर्फ एक बार जाता था डायरी लिखने अब तो बार बार जाना पड़ रहा है।

इसकी कोई दवा दारू है के नहीं?

दवा का पता नहीं पर लगता है की दारू ही इस रोग से पीछा छुड़ाएगी। रात को पियो, कम्बल ओढ कर सो जाओ । सुबह दिमाग में हेंग ओवर का दर्द होगा विचारों का नहीं। बस यही रास्ता दीखता है।

हा भैया इलाज तो जल्दी करो तुम्हारे छोटे छोटे बच्चे हैं उनका ख्याल कौन रखेगा अगर तुम ऐसे ही टेबल पर बैठे रहे तो ....

हाँ कुछ तो करूँगा ही!

अच्छा भाई राम राम।

राम राम भाई राम राम।


3 टिप्‍पणियां:

  1. बिल्‍कुल बजा फरमा रहे हैं आप। ऐसा ही हाल है यहाँ ब्‍लाग जगत में सभी का। ऐसा लगता है कि लिखने की होड़ लगी है। बढिया व्‍यंग्‍य, बधाई।

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  2. sahi kahte ho bhai
    aajkal ye hi to ho raha h
    koi khud ki publicity ke liye kuch aisa likh deta h jiska na to koi or hota h na hi koi chor
    achi kaushish hain.

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  3. आपके विचारों को...

    दस्त यदि हिंदी में लगें तो कल्चर का कच्छा खराब हो जाएगा.

    दस्त अगर उर्दू भाषा में लगें हों तो कोई-न-कोई थाम लेगा.

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