मंगलवार, 4 मई 2010

उस अँधेरे कोने से आवाज आती है ..... मुस्लमान मर रहा है!

मुझे बहुतों ने कहा ..... उधर उस अँधेरे कोने की तरफ न जाना वहां खतरा है। पर जाने क्यों, शायद मैं आदम का जाया हूँ, इसलिए उन लोगों के कहने की परवाह न करके मैं उस अँधेरे कोने की तरफ खीचा चला गया.........

पास पंहुचा तो एक चीख सुनाई दी और एक आवाज आयी मुस्लमान मर रहा है.... मुसलमान मर रहा है......

और नजदीक पंहुचा तो आवाजें स्पष्ट सुनायी देने लगी। कोई मुझे पुकार रहा था....


अरे , ओ ! इधर आओ। रौशनी में क्यों खड़े हो? इधर अँधेरे में आओ। सुनो ! क्या तुम्हे पता नहीं मुसलमान मर रहा है। चारों तरफ कत्ले आम मचा है। कोहराम मचा है। चुन चुन कर मुसलमान मारे जा रहे हैं। हर ओर आग लगी है। मुसलमान मर रहा है। क्या तुम्हे ये आवाजे सुनाई नहीं दे रही! ध्यान से सुनो।

हँस मत, परिहास न कर
मुसलमान मर रहा है
जेहाद कर जेहाद कर।

न चेन ले, न चेन लेने दे
मुसलमान मर रहा है
जेहाद कर जेहाद कर।

शोर बढता गया, आवाजें बड़ी भयानक और जनूनी थी। मैं हिन्दू हूँ जुनून मेरी फितरत में नहीं, अतः मैं डर गया, पसीने पसीने हो गया और मेरी नींद खुल गयी।


सपने को हकीकत समझ और आँखों देखि असलियत को नज़रंदाज़ कर मैंने अपने आस पड़ोस और परिचित मुस्लिम भाइयों के हाल चाल पूछने का सिलसिला शुरू किया।

अनीस मियां को फोन मिलाया। अनीस अहमद मेरे साथ मेरे ऑफिस में काम किया करते थे और पिछले वर्ष उन्होंने ३० बहुत की नोकरी के बाद स्वेच्छिक अवकाश ले लिया। उनकी दिल्ली की जामा मस्जिद के मीना बाज़ार में अपनी दुकान है , अब उसकी देख रेख करते हैं। मैंने अनीस मियां से पूछा सब ठीक है। उन्होंने बताया पाण्डेय जी सब ठीक ठाक चल रहा है। जब से MCD ने इस ईलाके की साफ सफाई की है तब से तो दुकानदारी चमक गयी है।

मैंने सोचा अनीस मियां तो पुरानी दिल्ली के बाशिंदे हैं वहां उन्हें क्या तकलीफ होगी । मेरा बचपन का दोस्त मुजाहिद खान तो मयूर विहार के इलाके में रहता है जहाँ हिन्दू ही हिन्दू हैं। अकेला मुस्लमान चारों तरफ हिन्दुओं से घिरा हुआ। उसका हाल जरुर ख़राब होगा।

मैं मुजाहिद के घर पंहुचा। वो अब बदल गया है। उसकी तोंद निकल आयी है। उसके बच्चे स्कुल जाने के लिए तैयार हो रहे थे। मुझे देख कर वो चौक गया । अबे पाण्डेय तू कहाँ से प्रकट हो गया सुबह सुबह। मुलाकात हुई। हाल चल पूछे गए। मैंने अपनी शंका उसके सामने भी रख दी । सब ठीक है क्या ?

हाँ सब बढ़िया है। धंधा अच्छे से चल रहा है। जिंदगी की परेशानिया तो चलती रहती है पर वैसे सब ठीक है।

हमारी कालोनी में एक के बाद एक प्लाट खरीद कर फ्लैट बना रहे शब्बीर से भी मैंने उसके हाल चाल पूछे । "पाण्डेय जी मैं तो अब आनंद विहार की पॉश कालोनी में फ्लैट बनवा रहा हूँ । यहाँ से बहुत कमाई कर ली, अब बड़ा काम करेंगे। बस ऊपर वाले का साथ मिलता रहे।" मैंने पूछा उपरवाला मतलब पुलिस वाले और कोर्पोरेशन वाले तो वो हंस दिया।

अब मैंने बड़ी हस्तियों पर ध्यान देना शुरू किया । आमिर खान की नयी फिल्म थ्री इडियट आयी, मैंने सोचा ये फिल्म पिट जाएगी क्योकि हिंदुस्तान में तो हिन्दू रहते है और आमिर खान एक मुस्लमान है। जाहिर है उसकी फिल्म नहीं चलेगी पर थ्री इडियट हिट हो गयी। फिर शाहरुख़ खान की फिल्म आयी , मैंने सोचा ये जरुर पिट जाएगी पर ये फिल्म भी हिट हो गयी ।

ईद आयी मैंने सोचा की लोगों का उत्साह शायद इस बार कुछ कम होगा क्योकि मुस्लमान मर रहा है । पर कोई फर्क नज़र नहीं आया। पुरानी दिल्ली में वही भीड़ । पड़ोस की अल्लाह कालोनी में वही चहल पहल।

मैं समझ नहीं पाया मैं कहाँ जाऊ ? कैसे पता करूँ की मुस्लमान कहाँ मर रहा है? कहाँ सताया जा रहा है? जिसके कारण कुछ बुद्धिजीवी अपनी हसीं भूल कर रोये जा रहे हैं।


मैंने टेलिविज़न खोला । उस पर चर्चा थी की गुजरात में मुस्लमान मारे गए, मोदी गुनाहगार है। उसे अभी तक सजा नहीं दी गयी। यह मुसलमानों के साथ भेद भाव की निति है। मेरे मन में प्रश्न आया की जिस देश में सरे आम हजारो लोगों को गोली चला कर मारने वाले आतंकवादी अजमल कसब को जिसकी करतूत को लाखो लोगों ने अपनी आखों से लाइव देखा था , अभी तक सजा नहीं मिल पाई वहां मोदी जिसकी भूमिका स्पष्ट भी नहीं है, उसे सजा मिलने में तो एक जन्म का इंतजार करना ही पड़ेगा।


जैसे दिल्ली व मुंबई के बम धमाके बाबरी मस्जिद को गिराने के विरोध में हुए थे वैसे ही गुजरात की घटना के पीछे भी गोधरा कांड को जायज ठहराया जा सकता है।


हाँ तो मैं थोडा भटक गया था । मैं खोज रहा था वो जगह जहा निर्दोष मुस्लिमों का कत्लेआम हो रहा है।
कश्मीर वो जगह हो सकती है। पर कश्मीर में तो कश्मीरी पंडित भी रहते है। वे भी बेचारे निर्दोष है। अतः कश्मीर में अकेले मुस्लमान नहीं मर रहे । पहले तो हिन्दू भी मारे जा चुके में। में को छोड़ो कहीं और चलो।


पंजाब। नहीं वहां तो सिर्फ हिन्दू मारे गए थे। किस की शाह पर ? वो याद नहीं आ रहा।


तो चलो अपना नजरिया थोडा बदल कर देखे । थोडा उल्टा सोचे। ये देखता हूँ की अगर हिंदुस्तान में मुस्लमान मारे जा रहे हैं तो वो सुरक्षित कहाँ पर है ?



पाकिस्तान में सभी मुस्लमान सुरक्षित हो सकते हैं। वहां तो शरियत का कानून चलता है। अफगानिस्तान में भी मुस्लमान सुरक्षित हो सकते है। या फिर इरान में , इराक में, या दुबई में।


क्या करूँ मुझे नज़र नहीं आता की निर्दोष मुस्लमान कहा मारे जा रहे हैं? मेरी दृष्टी तो आस पास तक ही जाती है। ज्यादा दूर तक नहीं पहुच पाती है। शायद मेरी इंसानी नजर है। इतनी दूर तो सिर्फ गिद्ध ही देख पते हैं। क्या मुझे भी गिद्ध बनान पड़ेगा ताकि दूर हो रही घटनाओ को देख कर अपने इलाके के शांत माहोल को गरम कर सकूँ। यहाँ की प्रगति में कोई रोड़ा अटका सकूँ ताकि जो मुझे दूर होता दिख रहा है वो सब यहीं हो जाय और मुझे अपने पसंदीदा गिद्ध भोज के लिए दूर न जाना पड़े।


कुछ समय पहले मैंने एक मुस्लमान, (इन्सान शब्द का प्रयोग करना चाह रहा था पर एक स्वच्छ सन्देश में पढ़ा की अगर आप इन्सान हैं तो मुस्लमान नहीं हो सकते और जिससे मैंने संवाद किया था वो तो एक घोषित मुस्लमान है अतः उसे मुस्लमान ही कह रहा हूँ.) को थोडा शांत और सहज होने के लिए कहा तो उसने जवाब दिया था की चारो तरफ मुस्लमान मारे जा रहे हैं इस लिए वो शांत व सहज नहीं हो सकता। उस वक्त मैंने ये लेख लिखा था पर जाने क्यों पोस्ट नहीं किया था। अभी थोड़ी देर पहले वही पुराना राग फिर से सुन रहा हूँ की निर्दोष मुस्लमान मारे जा रहे हैं इसलिए ये पुराणी पोस्ट याद आ गयी और प्रकाशित कर रहा हूँ।

16 टिप्‍पणियां:

  1. Mare janewale sab insaan hi hote hain...Hindu ya musalmaan nahi..Jab sab insaan mar jayenge,tab bache hue hindu ya musalmaan kahlayenge..

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  2. बहुत अच्छी पोस्ट है...

    आप 'इंसान' से संबंधित जिस पोस्ट का ज़िक्र कर रहे हैं, वो हमारे ही बारे में है... हा हा हा

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  3. आदम-बू, आदम-बू।
    भाई इस युग में जब हर कोई हिन्दू है, मुसलमान है, सिख है या ईसाई है, कहां से आ गये हो तुम?
    बाघ तो फ़िर भी चौदह पन्द्रह सौ बचे हैं, इन्सान कितने बचे हैं?

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  4. Bahut badhiya chhaka mara hai apne.

    Musalman to mar rahe hain......... aur unhe unke apne mar rahe hain.

    Zehad kar- Zehad kar

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  5. Bahut achchi post hai :)

    Jis tarah se aapne apni baat ko samjhaya hai , sach me adbhud hai :)

    aap post padne vale ko "VICHAAR SHOONYA" kar dete hai :)

    Dhanyavaad :)

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  6. यह हौवा भी हत्यारों का ही खडा किया हुाहै ताकि माहौल में आतंक फैले ।
    आपकी पोस्ट बहुत सुलझी हुई है पर सुलझे इन्सानों के लिये ।

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  7. "....यहाँ की प्रगति में कोई रोड़ा अटका सकूँ ताकि जो मुझे दूर होता दिख रहा है वो सब यहीं हो जाय और मुझे अपने पसंदीदा गिद्ध भोज के लिए दूर न जाना पड़े।"

    ye paragraph to dil ko touch kar gaya isiliye dobara post karne aa gaya :)

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  8. बहुत बढिया पोस्ट लिखी है ..आप ने सही इशारा किया है कि इन्सान कहलाना शायद यहाँ कोई पसंद नही करता.॥.बढिया पोस्ट पढ़वाने के लिए आभार।

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  9. @ "कश्मीर वो जगह हो सकती है। पर कश्मीर में तो कश्मीरी पंडित भी रहते है।"

    कब की बात कर रहे है पांडे जी . कितने बचे है मुसलमानों को बचाने (बसाने) के चक्कर में अब वहां ???????
    है कोई माँ का लाल मानवाधिकारवादी उनकी आवाज उठाने वाला जो, कसाब, अफज़ल,नक्सली,और ना जाने किन किन इंसानियत के हत्यारों का पक्ष लेते है .क्या कभी कश्मीरी पंडितो के अधिकार नहीं दिखे उनको . जो बिचारे अपने ही घर से बेदखल, और मार - काट दिए गए?????????????

    बधाई आपको हकीकत से साक्षात्कार के लिए

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  10. "मुस्लमान मर रहा है.... मुसलमान मर रहा है......" Sundar Jaankaaree :)

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  11. सच में ,मर ही तो रहा है "मुसलमान"

    कुंवर जी,

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  12. महान पोस्ट
    कृपया मेरे ब्लॉग पर भी पधारें और मुझे कृतार्थ करें

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  13. मै तो यहाँ इन्सान ढूँढ रही हूँ………………………ये हिन्दू,मुसलमान ,सिक्ख कहाँ से आ गये?………………………किस युग मे जी रहे हो जनाब्…………………यहाँ अदद इन्सान नही मिलता और आपको मुसलमान मिल गये।
    एक सार्थक और सभी को सोचने को मजबूर करती पोस्ट्।
    आप इस लेख को किसी अखबार मे जरूर छपवायें ताकि हिन्दू -मुसलमान मे बाँट्ने वाले जान सकें सच को………………वैसे काफ़ी हद तक दुनिया जानती है मगर मानना नही चाहती वरना अपनी सत्ता पर कैसे काबिज़ रहेंगे।

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  14. विचारशून्य होकर भी इतनी विचारवान बातें?

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  15. मुसलमान मरेगा तो इंसान जी उठेगा.

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