बुधवार, 29 सितंबर 2010

शहीद भगत सिंह की याद में कुछ मेरे मन की कुछ बातें

शहीद भगत सिंह बचपन से मेरे हीरो रहे हैं. मैं छुटपन से ही किताबें पढने का शौक़ीन रहा हूँ. सभी क्रांतिकारियों के विषय में खूब पढ़ा. चंद्रशेखर आजाद ,भगत सिंह, अशफ़ाक उल्ला खाँ जैसे क्रांतिकारियों के बारे में जानकर मैं हमेशा ही उत्साहित होता रहा.
जाने क्यों मुझे कभी भी महात्मा गाँधी या जवाहर लाल नेहरू ने उतना प्रभावित  नहीं किया जितना इन क्रांतिकारियों ने किया. हो सकता है बाल अवस्था में बच्चे रोमांच कि ओर ज्यादा आकर्षित होते हों. बचपन के ही उस आकर्षण को लेकर बड़ा हुआ. 
दरियागंज के सन्डे बाजार में घूमते हुए एक बार शहीद भगत सिंह के बारे में लिखी किताब मेरे हाथ आयी जो शायद मैं पैसे कम पड़ने कि वजह से खरीद नहीं पाया और जिसका मुझे आज भी बहुत मलाल है. पर मैंने वही पर खड़े खड़े उसे पढ़ा. उसमे भगत सिंह जी के समाजवाद व अन्य विषयों पर लिखे कई निबंध नुमा लेख थे जिन पर एक नजर मारने पर ही मुझे एहसास हो  गया कि  वास्तव में भगत सिंह कितने बड़े विचारक थे. इतनी कम उम्र में भी उनकी सोच कितनी विकसित थी.
वो व्यक्ति  मात्र २३ वर्ष कि अवस्था में फंसी के फंदे पर झूल  गया और ये एक स्वयं  वरण की हुई शहादत थी जिससे वो चाहते तो आसानी से बच सकते थे.   ऐसे महान व्यक्तित्व को इस देश ने कितनी आसानी से भुला दिया. मैंने कल किसी भी राष्ट्रीय स्तर के समाचारपत्र में उनके विषय में कोई भी लेख नहीं देखा. हो सकता है की यहाँ वहां कुछ लिखा भी हो तो वो मेरी नज़र से चूक गया हो लेकिन कुछ विशेष कहीं नहीं था .  

वहीँ मैं जब भी उनके समकक्ष  जवाहर लाल नेहरू को रखता हूँ तो मैं नेहरू जी को बहुत बौना पाता हूँ. ज्यों ज्यों जवाहर लाल जी के विषय में जाना त्यों त्यों गाँधी परिवार के प्रति मेरे मन का सम्मान  जाता रहा. कहते हैं की मोती लाल नेहरू ने वकालत के पैसे से इतना धन कमाया था की उससे उनकी सात पीढियां आराम से खा सकती थी और  उन्होंने वो सब देश पर न्योछावर कर दिया पर मुझे ऐसा कुछ नहीं  लगता. मोती लाल जी ने एक सोचा समझा निवेश किया. उन्होंने अपने जीवन की कुछ वर्षों की कमाई देकर  इस देश पर राज करने का पट्टा  अपनी जाने कितनी  पीढ़ियों के नाम लिखवा लिया. जवाहर लाल, इंदिरा गाँधी, संजय गाँधी, राजीव गाँधी, सोनिया गाँधी ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस देश पर राज किया और भविष्य में  राहुल गाँधी या प्रियंका गाँधी के राज करने की संभावना है.

जवाहर लाल जब प्रधान मंत्री बने तो उस वक्त उनसे ज्यादा सक्षम और बेहतर  नेता देश में मौजूद थे पर नेहरु जी का भाग्य उनके साथ और इस देश का भाग्य भगवान भरोसे था. जरा सोचो भगत सिंह २३ वर्ष में ही दुनिया छोड़ कर चले गए और अपने जवाहर लाल २४ या २५ वर्षा की आयु में मजे से विद्या अध्ययन कर इंग्लैंड से वापस लौटे. फिर उनका विवाह उनके पिता द्वारा विशेष रूप से चुनी गयी कन्या के साथ कर दिया गया. इसके बाद उन्होंने  असहयोग आन्दोलन के समय यानि की १९२१-२२ से देश के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया जब उनकी आयु लगभग ३२-३३ वर्ष के आस पास रही होगी. यानि की कहा जा सकता है की वो जवानी  के पूरे मजे लेने के बाद स्वतंत्रता संग्राम के युद्ध में कूदे. इसके बाद  नेहरू के ऊपर  गाँधी जी का वरद हस्त रहा जिन्होंने उन्हें प्रधानमंत्री का पद दिलवा दिया. वहीँ हमारे प्यारे महात्मा गाँधी जी ने भगत सिंह जी की फांसी को टालने के लिए कुछ भी नहीं किया.

भगत सिंह जी ने इस देश के लिए अपनी जान दे दी और नेहरू जी इस देश को दी अपनी वो संताने जो  तमाम अक्षमताओं के बावजूद आज तक इस देश पर राज कर रही हैं.

31 टिप्‍पणियां:

  1. भाईजी नेहरु तो आजादी के हर परवाने के सामने बौने थे. भगतसिंह कि तो कहाँ बराबरी करेंगे. बहुत धन्यवाद् सार्थक लेख के लिए

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  2. @ जवाहर लाल जब प्रधान मंत्री बने तो उस वक्त उनसे ज्यादा सक्षम और बेहतर नेता देश में मौजूद थे

    # क्यों मज़ाक करते हो भाईजी नेहरु कब सक्षम हो गए !!!!!!!!

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  3. @ नेहरु जी का भाग्य उनके साथ और इस देश का भाग्य भगवान भरोसे था

    # भाग्य नहीं गांधीजी का साथ था, देश का तो अब भी भगवान् भरोसे ही है

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  4. ये अपना पसंदीदा विषय है। आजादी जिन लोगों के कारण मिली, उनका कोए नामलेवा भी नहीं है। पूरी आजादी की लड़ाई को गांधी-नेहरू की जोड़ी हाईजैक करके ले गई। जो इतिहास पढ़ाया जा रहा है, उस तक में कहीं भगत सिंह, आजाद, नेताजी, बिस्मिल, अशफ़ाक उल्ला खां जैसों का नाम या तो है नहीं या न के बराबर है।
    भगत सिंह जैसे लोग अगर जिन्दा हैं तो कुछ ही लोगों के दिलोदिमाग में।
    ऐसे unsung heroes को हमारा सलाम।

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  5. शहीद् ए आजम सरदार भगत सिंह जी को उनके १०४ वे जन्म दिवस पर शत शत नमन करता हूँ !

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  6. हमारे प्यारे महात्मा गाँधी जी ने भगत सिंह जी की फांसी को टालने के लिए कुछ भी नहीं किया

    आपकी भावनाओं का पूर्ण सम्मान करते हुए कहता हूँ कि चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, अशफ़ाक उल्ला खाँ जैसे क्रांतिकारी अपने भी हीरो हैं परंतु उनके सम्मान के लिये मुझे उनकी तुलना गान्धी-नेहरू से करने की आवश्यकता नहीं दिखती है। इन सभी का देशप्रेम अलग-अलग तरीके से अभिव्यक्त हुआ है परंतु एक के बडप्पन से दूसरा छोटा नहीं होता है। बडे लोगोंकी बडी बातें समझना अक्सर उतना आसान नहीं होता है जितना हम चाहते हैं। साथ ही यह भी याद रहे कि महात्मा गान्धी न तो भारत के शासक थे और न ही क्रांतिकारियों के नेता। जिसके बस में जितना था, सबने किया। नेताजी बोस अपनी फिल्म गान्धीजी को दिखाने के लिये यूँ ही साथ नहीं रखते थे, कुछ था कि क्रांतिकारी भी गान्धीजी का उतना ही सम्मान करते थे जितना कि अहिंसक कार्यकर्ता। [टिप्पणी बॉक्स अति-सूक्ष्म है अतः थोडे को बहुत समझिये]

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  7. भगत सिंह जी को उनके जन्म दिवस पर शत शत नमन!!

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  8. जल्दी में हूँ ... केवल हेडिंग में भगत सिंह नाम देखकर आ गया हूँ
    पोस्ट ठीक से नहीं पढी है ...ये लिंक दिए जा रहा हूँ

    http://my2010ideas.blogspot.com/2010/03/blog-post_4401.html?showComment=1277679246051#c6424714505425744607
    आज बस इतना ही ... बाय बाय

    जय हिंद

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  9. .....और हाँ अमित भाई .. अब क्या बोलूं ? :) अच्छा सोच के बताऊंगा :))
    आपकी आज की पोस्ट पढ़ के भावुक हो गया हूँ
    आभार :)

    "आभार " .... ये शब्द काफी छोटा लग रहा है

    जल्दी ही वापस आऊंगा

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  10. amit sharma ji se bilkul sahmat hun.
    jinhone desh ke liye apni jaan de di unke saamne ye saale poltician's(pardon for my language) ki kya aukat h

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  11. शहीद् ए आजम सरदार भगत सिंह जी को उनके १०४ वे जन्म दिवस पर मेरा शत शत नमन

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  12. भगत सिंह जी को उनके जन्म दिवस पर शत शत नमन!!



    ज़रा यहाँ भी नज़र घुमाएं!
    राष्ट्रमंडल खेल

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  13. इस पोस्ट के लिये हार्दिक आभार
    27 सितम्बर को शहीद भगतसिंह जी की जन्मतिथि थी। मीडिया या न्यूज चैनलों पर कहीं भी शहीद के बारे में कोई रिपोर्ट नहीं देखी। जबकि रणवीर कपूर (अभिनेता) का जन्मदिन मनाया जा रहा था।

    इन्दिरा गांधी को मैं अक्षम नेता नहीं मानता हूँ।

    प्रणाम स्वीकार करें

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  14. भाईसाहब
    नमस्कार !
    इतने गंभीर विचारक हो'कर मुझ जैसे भोले लोगों को भ्रमित करने के लिए 'विचारशून्य' नाम क्यों रखा है आपने ?
    बहुत सत्य लिखा है आपने
    अमित भाई ने मेरे ही मन की बात कही है , उनका भी आभार !

    अपनी एक ग़ज़ल के कुछ शे'र आपको और अमित जी को सादर समर्पित हैं -

    चमन के सरपरस्तों से न गर नादानियां होतीं
    न हरसू ख़ार की नस्लें गुलिस्तां में अयां होतीं

    कभी पंजाब मीज़ोरम असम में आग ना लगती
    न ही कश्मीर में ख़ूंकर्द केशर - क्यारियां होतीं

    न हिजड़ों को बिठाते हम अगर दिल्ली की गद्दी पर
    न चारों ओर बहते ख़ून की ये नालियां होतीं



    * भगतसिंह और उन जैसे तमाम देशभक्तों को लाखों सलाम !करोड़ों नमन ! हार्दिक श्रद्धांजलि ! *


    ऐसे महत्वपूर्ण विषयों को स्पर्श प्रदान करते रहें , कृपया ।
    एक आवश्यक आलेख के लिए आपका आभार !
    - राजेन्द्र स्वर्णकार

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  15. आप ने ये पोस्ट लगने में दो दिन की देरी कर दी मै २७ को ही इस तरह की पोस्ट ढूंढ़ रही थी एक पोस्ट मिली थी शिवम् मिश्रा जी की चलिए देर आये दुरुस्त आये |

    आपकी पहली लाइन से लेकर आखरी लाइन तक सहमत हु | नेहरू जी को गाँधी जी ने देश के ऊपर लादा था वर्ना कांग्रेस में इस पर बनी कमिटी ने तो सरदार पटेल को चुना था जो गाँधी जी के कहने पर चुने जाने के बाद भी पीछेहट गये गाँधी जी का लादा बोझ आज तक हम सभी को ढोना पड़ रहा है और आगे भी ढ़ोने के लिए तैयार रहिये युवराज अपनी गद्दी संभालने के लिए तैयार है |

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  16. भगत सिंह जी को उनके जन्म दिवस पर शत शत नमन!!

    उत्तर देंहटाएं
  17. प्रिय @विचारशून्य जी

    इस ब्लोगजगत में जिस दिन से आपसे मुलाकात और संवाद का अवसर प्राप्त हुआ उसी दिन से मेरी आपके प्रोफाइल पर लगाई हुई फोटो के प्रति एक उत्सुकता और जिज्ञासा बनी हुई है
    ये जो आपके प्रोफाइल पर फोटो लगी हुई है ये आपकी वास्तविक फोटो है या इरफ़ान पठान की है ?? , सच में मैं day 1 से इसके बारे में confuse हूँ क्योंकि फोटो इरफ़ान पठान से बहुत मेल खाती है

    अब तो जिज्ञासा शांत करें प्रभु


    महक

    उत्तर देंहटाएं
  18. प्रिय @विचारशून्य जी

    इस ब्लोगजगत में जिस दिन से आपसे मुलाकात और संवाद का अवसर प्राप्त हुआ उसी दिन से मेरी आपके प्रोफाइल पर लगाई हुई फोटो के प्रति एक उत्सुकता और जिज्ञासा बनी हुई है
    ये जो आपके प्रोफाइल पर फोटो लगी हुई है ये आपकी वास्तविक फोटो है या इरफ़ान पठान की है ?? , सच में मैं day 1 से इसके बारे में confuse हूँ क्योंकि फोटो इरफ़ान पठान से बहुत मेल खाती है

    अब तो जिज्ञासा शांत करें प्रभु


    महक

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  19. भाई इरफ़ान पठान जी ? भगत सिंह के चाहने वाले हम भी हैं !

    उत्तर देंहटाएं

  20. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

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  21. दोनो में कोई मुकाबला नही है .... भगत सिंह और नेहरू ....

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  22. जनाब आपने अभी तक उलझन दूर नहीं की ???

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  23. शहीद भगतसिंग जी को शत शत नमन । काश कि उनकी याद में कोई कार्यक्रम आयोजित होते तो ये शेर यथार्थ हो जाता ।
    शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले
    वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा ।

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  24. कभी कभी मुझे लगता है की वो "अद्रश्य सत्ता धारी" ऊपर वाला जुल्म बढ़ने पर इस तरह के अवतार भेजता रहा है
    इनके पांच तत्वों से बने शरीर में मौजूद तेजस्वी मन जलियाँवाला बाग़ काण्ड जैसी घटनाओं से निकली आँहों की नकारात्मक ऊर्जा को अपने मस्तिष्क में किसी तरह सकारात्मक बना कर इनके निर्णयों को ठोस और इरादों को फौलाद बनाता है
    सरदार भगत सिंह जैसे लोग "प्रकृति के अन्याय के प्रति संतुलन" बनाए रखने की प्रवृति का प्रतीक भी लगते है

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  25. .

    शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले
    वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा ।

    शहीद भगतसिंग जी को शत शत नमन !!!!

    .

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  26. हॉट सेक्शन अब केवल अधिक 'पढ़े गए' के आधार पर कार्य करेगा

    ब्लॉग जगत में अच्छे लेखन को प्रोत्साहन की जगह केवल टिप्पणियों की चाह एवं गलत तरीकों से की गई टिप्पणियों के बढ़ते चलन की जगह अच्छी रचनाओं को प्रोत्साहन के प्रयास एवं रचनाओं को लोगों की पसंद के हिसाब से ही हॉट सेक्शन में लाने का प्रयास किया जा रहा है. हॉट सेक्शन के प्रारूप में बदलाव करते हुए अधिक टिप्पणियां वाला सेक्शन 'टिप्पणिया प्राप्त' हटा दिया गया है तथा अब यह सेक्शन 'पढ़े गए' के आधार पर कार्य करेगा.

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  27. मित्र उस दिन मैं कुछ कहना चाहता था। पर रुक गया, पोस्ट रोक दी। दरअसल मैं उनकी कुछ किताब पढ़ रहा हूं। उनकी फांसी के संदर्भ में गांधी जी का रवैया भी पढ़ा है। मगर इस पर शहीदे आजम ने कुछ कहा ये नहीं देखने को मिला है। हां इतना जरुर पता है कि आजा़द इस सिलसिले में गांधीजी से मिलने की कोशिश में थे, या उनका संपर्क हो चुका था। नतीजा क्या था सबको पता है। ये बात तय है कि जब युद्) होता है आहुतियां जवानियां ही दिया करती हैं। 15 अगस्त पर एक पोस्ट है करगिल के जवानो की मेरी जान तिरंगा मेरी शान तिरंगा।

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  28. इसमें कोई संदेह नहीं कि आजादी की लड़ाई में क्रांतिकारियों के सहयोग को कम आंका गया है | यह भी सच है कि नेहरू जी को उनके त्याग का जरूरत से ज्यादा प्रतिफल मिला | लेकिन गांधी जी की सत्यनिष्ठा, साहस, अहिंसक नेतृत्व और अजादे दिलाने में उनकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगाया जा सकता |

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  29. क्या जरुरी है कि किसी एक की प्रशंसा करने के लिए अन्यों को बुरा भला कहा जाये.

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  30. बहुत ही अच्छा लिखा है हर बात से सहमत हूँ आपकी जारी रखियेगा आगे भी

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