रविवार, 5 सितंबर 2010

कश्मीर हमारा है

मैं छोटा था तब आपने परम मित्र प्रतुल के साथ संघ की शाखा में जाया करता था. वहां हम सभी बच्चे मिल कर एक खेल खेला करते थे "कश्मीर हमारा है". ये संघ का प्रयास था बच्चों के भीतर देश के महत्वपूर्ण हिस्से के प्रति प्रेम पैदा करने का और सच कहूँ तो इस प्रयास से मेरे जैसे अनेक भारतीयों के दिल में संघ ने अपने देश के उस अनदेखे हिस्से के प्रति प्रेम तो पैदा किया ही होगा.


आप कह सकते हैं की क्या सिर्फ कश्मीर ही हमारे देश का एक महत्व पूर्ण हिस्सा है. क्या बाकि हिस्से महतवपूर्ण नहीं तो इसका जवाब ये हैं की आजादी के बाद से कश्मीर हमारे देश का वो हिस्सा है जिस को देश से अलग करने का षड़यंत्र पडोसी देश पाकिस्तान अरसे से कर रहा है और कामयाबी की तरफ बढ़ता जा रहा है. यूँ तो चीन भी हमारे देश के एक हिस्से यानि की अरुणाचल प्रदेश पर अपना अधिकार जताता रहा है पर वहां पर हमारी चिंता बाहरी आक्रमण की है वहां भीतरघात की चिंता नहीं है. कश्मीर में तो मुस्लिम आबादी ज्यादा होने की वजह से भीतरघात सबसे बड़ी चिंता है.


कश्मीर समस्या सिर्फ इतनी सी है की मुस्लिम बहुल कश्मीर के हिन्दू राजा ने कश्मीर का भारत में विलय करवा दिया जो की पाकिस्तानी हुक्मरानों और कुछ तत्कालीन कश्मीरी मुस्लिम नेताओं को हजम नहीं हुआ. तब से आज तक पाकिस्तान के लिए ये सिर्फ नाक का सवाल बन गया है. एक आम कश्मीरी चाहे वो मुस्लमान हो या किसी दुसरे धर्म का (वैसे दुसरे धर्म के लोग कश्मीर में इस्लामिक आतंकवादियों ने छोड़े ही नहीं है और जो थोड़े बहुत हैं उन्हें भी घाटी छोड़ देने का नोटिस दिया जा चुका है ) कभी भी पाकिस्तान के साथ नहीं जाना चाहेगा. ये बात १९४७ के बाद से अस्सी के दशक के अंत तक कश्मीर में व्याप्त शांति से स्पष्ट होती है. हालाँकि इस दौरान पाकिस्तान ने भारत के साथ कश्मीर को लेकर तीन युद्ध लड़े और सभी में मुह की खाई. अस्सी के दशक के अंत में जब अफगानिस्तान का मुद्दा ख़त्म हुआ और पाकिस्तान को भी तब तक समझ आ चुका था की प्रत्यक्ष युद्ध से कश्मीर को जीता नहीं जा सकता तो उसने अपने असली और ताकतवर हथियार का इस्तेमाल किया और वो हथियार था "कश्मीर में इस्लाम खतरे में है" अफगानिस्तान में लड़ रहे आतंकी कश्मीर आ गए और उन्होंने कश्मीर में इस्लामी आतंक की शुरुवात की. मासूम कश्मीरी पंडितों का कत्ले आम कर उन्हें घाटी से भगा दिया गया. आज कोई उनकी सुध लेने वाला और उन पर कविता लिखने वाला नहीं है. सभी लोग कश्मीर की पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित पत्थरमार भीड़ की क़ुरबानी पर कवितायेँ लिख रहे हैं.


अब  सारी बात साफ़ साफ़ बता ही दूँ. मेरे मन में कल से एक तूफान सा मचा है. एक ब्लॉग है जनपक्ष. उसमे कश्मीर पर एक कविता पोस्ट हुई. साथ में एक चित्र भी था. चित्र में एक वर्दीधारी एक महिला पर बन्दुक तन रहा है और कविता की एक पंक्ति कहती है "सिर पर निशाना साधे इतने जवान". बस क्या बताऊँ चित्र देख कर और कविता की इस पंक्ति को पढ़कर बहुत गुस्सा आया. अपना उस वक्त का सारा गुस्सा वही पर टिप्पणी के रूप में थूक आया पर दिल में शांति अभी भी नहीं हुई.


मुझे समझ नहीं आता की इस प्रकार की कविता लिखने वाले लोग क्या कश्मीर की समस्या को नहीं समझते? कश्मीर में जो कुछ भी इस वक्त हो रहा है वो सब इस प्रकार के भड़काऊ वक्तव्यों की वजह से ही हो रहा है. पाकिस्तानी एजेंट सुरक्षा बलों पर भीड़ भरे इलाकों में आक्रमण करते हैं और जवाबी कार्यवाही में जब आम कश्मीरी मुसलमानों हताहत होता है तो लोगों को बरगलाते हैं की भारतीय सेना कश्मीरी मुसलमानों का क़त्ल कर रही है. अभी कुछ वक्त पहले ही मैंने एक ब्लॉग पर भी एक कश्मीरी बच्चे के भारतीय सेना के जवानों द्वारा की गयी हत्या का बहुत ही विस्तृत वृतांत पढ़ा.शायद उस पोस्ट का शीर्षक था "क्या आपके आपके घर में भी सात साल का बच्चा है". उसे पढ़कर भी मुझे बहुत निराशा हुई थी की सब कुछ जानते और समझते हुए भी लोग किस तरह से झूट के जाल में फंस जाते हैं और इसे आगे फैलाते हैं . ये लोग वास्तव में इतने निर्दोष ह्रदय हैं जो पाकिस्तान के इतने साफ़ सुथरे षड़यंत्र को भी नहीं समझ पा रहे हैं या इनकी असलियत कुछ और ही है. जब पढ़े लिखे लोग भी इस तरह की बातों को बढ़ावा देते हैं तो आम जनता जब काले बन्दर पर या गणेश जी के दूध पीने की बात पर विश्वाश करती है तो उसे मुर्ख या अन्धविश्वाशी क्यों बताया जाता है.


मैं अपने सभी भाइयों से कहना चाहता हूँ की कश्मीर भारत का हिस्सा है. कश्मीर में आम जनता सडकों पर उतार कर जो भी विरोध कर रही है वो पाकिस्तानी एजेंटों के भड़काने पर कर रही है. हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कभी कभी बल प्रयोग करना भी पड़ता है और इसमे कुछ जान माल की हानि भी होती है. ऐसे में सभी को मिलकर कुछ ऐसा करना चाहिए की आम लोगों का गुस्सा शांत हो ना की उनका गुस्सा और भड़क जाए.


जरा याद करें की उत्तराखंड की शांतिप्रिय जनता जब अलग राज्य की मांग कर रही थी तो उस वक्त भी अनेक लोग पुलिस की गोलियों के शिकार हुए थे. रामपुर तिराहा कांड में किस प्रकार से पुलिस कर्मियों ने औरतों के साथ बलात्कार किया था. वो उत्तराखंड के राष्ट्रभक्त लोगों के साथ किया गया क्रूरतम व्यव्हार था पर कभी भी उत्तराखंड के लोगों ने इस बात को लेकर देश से अलग होने के मांग नहीं की. ऐसी बात तो सुरक्षा बलों ने कश्मीर में कहीं भी नहीं की बल्कि कश्मीर में तो सुरक्षा बलों पर ही हत्या के मामले दर्ज किये जा रहे हैं. ये बात मैंने सिर्फ इसलिए याद दिलाई है ताकि वे लोग जो कश्मीर के हालात पर अपनी उलटी सीधी हरकतों से आम जन को भड़काने के लिए इस प्रकार के कार्य कर रहे हैं अपने बचाव में कोई कुतर्क ना पेश कर सकें.


वैसे तो मैं जानता हूँ की जिन लोगों के दिल में खोट है वो ठीक वैसा व्यव्हार करेंगे जैसा पाकिस्तानी अपने खिलाडियों के रंगे हाथों पकडे जाने पर भी उन्हें निर्दोष करार देकर कर रहे हैं.


मेरा पूरा विश्वाश है की जैसे पंजाब में पाक समर्थित आतंकवाद का सफाया हो चुका है और वहा अमन चैन व्याप्त है वैसा ही कुछ कश्मीर में भी अवश्य होगा क्योंकि कश्मीर हमारा है और हमारा ही रहेगा.

20 टिप्‍पणियां:

  1. आपने खूब किया है आज दूध का दूध, नीर का नीर
    हमारा ही है जी कश्मीर, हमारा ही है जी कश्मीर ।

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  2. पकिस्तान और उसके बाकी साथीयो भले ही कितनी भी कोशिशे कर ले पर यह आपने एकदम सत्य लिखा है कि कश्मीर सिर्फ़, सिर्फ़, सिर्फ़ और सिर्फ़ हमारा है !

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  3. मुझे समझ नहीं आता की इस प्रकार की कविता लिखने वाले लोग क्या कश्मीर की समस्या को नहीं समझते?
    बिके हुए जमीर इतने नासमझ भी नहीं होते हैं, उनकी रोटियाँ आतंकवाद के तवों पर ही सिंकती हैं। नागरिक मरें या सैनिक उन्हें क्या? उनके तो दोनों हाथों में लड्डू हैं मगर वे भूल जाते हैं कि लडाई अभी पूरी नहीं हुई है और अंत में सच का बोलबाला और झूठे का मुँह काला।

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  4. वहाँ यह टिप्पणी कर आया हूँ। मॉडरेशन लगा है इसलिए नहीं पता कि....

    जाने तुम लोगों के जन कौन हैं?
    जनपक्ष क्या है?
    जनज्वार किधर है?
    लगता है कि तुम लोग मिथक गढ़ रहे हो
    मिथकीय दुनिया में रह रहे हो।
    तुम्हारे मिथक कल्याण भाव नहीं
    जनध्वंश की नींव पूरते हैं।
    आँखें खोलो
    बुद्धि को जुम्बिश दो
    किताबी मिथकों के अलावा भी
    दुनिया में बहुत कुछ है।
    पीर का कोई रंग नहीं होता कवि!
    उसे लाल चश्मे की नहीं
    समझ भरी नज़र की ज़रूरत होती है।

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  5. तब से आज तक पाकिस्तान के लिए ये सिर्फ नाक का सवाल बन गया है. एक आम कश्मीरी चाहे वो मुस्लमान हो या किसी दुसरे धर्म का (वैसे दुसरे धर्म के लोग कश्मीर में इस्लामिक आतंकवादियों ने छोड़े ही नहीं है और जो थोड़े बहुत हैं उन्हें भी घाटी छोड़ देने का नोटिस दिया जा चुका है

    bhai naak ka swal ho chahe mooch ka
    marne walo aur tabah hone walo se unka dard to poochkar dekho.
    ye sab rajniti hain dost. ghatia Rajniti.

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  6. kashmir ki problem ka solution kabhi nikal hi nahi sakta... kyu ki abhi bhi jise dekho wo kehta hai ki kashmir hamara hai... aise to sirf vivad hi bad sakta hai lekin shaanti nahi aa sakti....

    A Silent Silence : Ek bejurm sazaa..(एक बेजुर्म सज़ा..)

    Banned Area News : Pop Singer Christina Aguilera on her marriage

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  7. पाकिस्तान मरते दम तक कश्मीर को नहीं छोड़ने वाला है उसे तो १९७१ का बदला लेना है | जो हमने किया अब वो करना चाह रहा है | यदि आप निष्पछ हो कर सोचे तो बात यही निकल कर आती है

    विचार शून्य जी आप ने सही कहा की कश्मीरियों को भड़काया जा रहा है पर कुछ लोग ऐसे भी है जो सीधे इनको गद्दार कहने लगते है और कहते है की उनको कश्मीर छोड़ कर पाकिस्तान चले जान चाहिए | एक सवाल उनसे की आप क्या चाहते है कश्मीर की जमीन या वहा के लोग क्या आप को सिर्फ जमीन चाहते है तो फिर आप में और साम्राज्यवादी चीन पाकिस्तान में क्या अंतर रह जायेगा | कश्मीर वहा के लोगों के साथ ही पूरा होता है हमें उनको इस नफरत भरी नजर से नहीं देखना चाहिए |

    मेरा मानना है की वो लोग जो सेना पर ज्यादती का आरोप लगा रहे है वो पूरी तरह से गलत भी नहीं है खुद मैंने इस बार के दंगो के दौरान देखा टीवी पर की एक समूह एक युवक का जनाजा ले कर जा रहा था और गुस्से और जोश में नारे लगा रहा था कोई पत्थरबाजी नहीं हो रही थी फिर भीपुलिस ने गोलिया चला दी | वो और गुस्से में आ गये | जब पुलिस बाकि हिस्सों में निर्दोषों को झूठे इनकाउन्टर में मार देती है तो फिर इस तरह के अशांत क्षेत्र में क्या होता होगा हम अंदाजा लगा सकते है |

    ये बात सही है की उनको भड़काया जा रहा है पर इस तरह के मामले ताकत के बल पर हल नहीं किये जाते है इनके लिए मानवीय चेहरा बड़ा रखना पड़ता है और ताकत का प्रयोग सोच समझ कर और गुनहगारो के खिलाफ ही किया जाना चाहिए | ऐसी जगहों पर हम ये नहीं कह सकते है की गेहू के साथ घुन तो पिसता ही है |जितने ज्यादा लोग हताहत होंगे उन्हें भड़काने का और मौका मिल जायेगा अच्छा हो की हम उन्हें ये मौका ही ना दे और थोडा और समझदारी से इस समस्या को हल करे |

    निश्चित रूप से कश्मीर हमारा है और वहा के लोग भी हमारे ही है ये भी ध्यान रखना ही होगा |

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  8. माफ़ कीजियेगा टिप्पणी ज्यादा लम्बी हो गई |

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  9. 'कश्मीर प्रेम हमारा' ...
    अपने छुटपन से तो है.
    'भितरघात की चिंता' ...
    ज़्यादा छुटजन* से तो है. >>>>>>[* छुटजन — अल्पसंख्यक ]
    'शीतयुद्ध का मतलब' ...
    कायर मुल्कन से तो है.
    'बेक़सूर की मौत' ...
    एके छप्पन से तो है.
    'खतरे में इस्लाम' ...
    मुसलमाँ खैरियत से तो हैं.
    'साफ़-सुथरा षड़यंत्र' ...
    समझते नियत से तो हैं.
    'थाली में का छेद' ...
    दिखेगा फितरत से तो है.
    'चैनो-अमन पैगाम' ...
    हमारी हसरत से तो है.

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  10. चित्र एक अधूरा सत्य होता है :

    एक ब्रह्मचारी प्रकृति निरक्षण कर रहा था. नदी, पर्वत, वृक्ष, बादल, खेत-खलिहान, उड़ाते पक्षियों के साथ उसकी दृष्टि पलभर को एक सुन्दर स्त्री पर पड़ी, तैसे ही एक मीडिया कर्मी ने अपना काम किया और उसे अपने कैमरे में कैद किया और उसे प्रचारित किया. "स्त्री को ताकता ब्रहमचारी". तब से ही ब्रह्मचारी को दुराचारी माना जाने लगा.

    [आप निगरानी रखो, खोटी नियत को पहचानो, अपने विचारों से चेतना जगाओ, पोस्टों से कवियों को उकसाओ, परिणाम निकलेगा, प्रतीक्षा रखें.]
    जहाँ तक बंदूकधारी जवान के चित्र का सवाल है. यह चलताऊ पूरी पिक्चर का एक अंश है, शायद सैनिक जाँच-पड़ताल कर रहा हो. उसमें सतर्कता होना लाजिमी है, यह कोई बुरी बात नहीं.]
    वास्तविकता अलग भी हो सकती है. यह अधूरा-सत्य है. पूरी बात जानना चाहिए.

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  11. .
    .
    .
    "मेरा पूरा विश्वास है की जैसे पंजाब में पाक समर्थित आतंकवाद का सफाया हो चुका है और वहां अमन चैन व्याप्त है वैसा ही कुछ कश्मीर में भी अवश्य होगा क्योंकि कश्मीर हमारा है और हमारा ही रहेगा।"

    आभार यह सब साफ-साफ कह देने के लिये...इसकी जरूरत भी है आज...मुझे भी आप के इस विश्वास पर पूर्ण विश्वास है...

    सुनिये मेरी भी....:-
    कश्मीर भारत के लिये समस्या नहीं बल्कि इम्तहान है... यह चुनौती भी है और अवसर भी...हल एकदम सीधा सादा व आसान है।



    आभार!


    ...

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  12. सार्थक विषय उठाया है आपने। आपके विश्वास को सलाम।

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  13. एक चैनल ने तो आतंकवादियों और कुछ कश्मीरियों के बीच में हो रही बातचीत के टैप को सुनवाया भी था जिसमें वो आतंकवादी सरगना कह रहा था की भारत विरोधी जुलुस में अभी और जानें जानी चाहिए ,सिर्फ इतनी से कुछ नहीं होगा ,तुम ठीक ढंग से अपना काम नहीं कर रहे हो ,ये काफी कम है

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  14. देशप्रेम की भावना से भरा अत्यंत ही उच्च कोटि का लेख
    आप की बात हर भारतीय तक पहुचनी चाहिए .
    इतने ह्रदय स्पर्शी लेख के लिए आप का बहुत बहुत आभार

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  15. सिर्फ एक गुण ... सिर्फ एक संस्कार ....देशभक्ति ... अगर किसी [स्त्री/पुरुष] में हो तो कितना भी धार्मिक या अधार्मिक , बुरा या अच्छा, पढ़ा लिखा या अनपढ़, ज्ञानी या अज्ञानी हो देश सुरक्षित है
    "पहले देश बाद में धर्म" .. ये सीक्वेंस होना चाहिए [जब इसका उल्टा होता है समस्या खड़ी होती है ]

    विचारोत्तेजक लेख है

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  16. waht khoob...sahi mein bahut achi lekhni hi :)

    http://liberalflorence.blogspot.com/

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  17. .
    [आप निगरानी रखो, खोटी नियत को पहचानो, अपने विचारों से चेतना जगाओ, पोस्टों से कवियों को उकसाओ, परिणाम निकलेगा, प्रतीक्षा रखें.]

    Pratul ji se sehmat hun..

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  18. भाई कोई आपाती कार्यक्रम था सो अनुपस्थिति रही पर वापसी में आलेख पढ़ा और आप पर गर्व कर रहा हूं !

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  19. आपके तुमुल घोष को मेरा समर्थन

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  20. देशप्रेम की भावना से भरा अत्यंत ही उच्च कोटि का लेख
    इतने ह्रदय स्पर्शी लेख के लिए आप का बहुत बहुत आभार

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