शुक्रवार, 20 अगस्त 2010

किसी से प्यार करो पर विश्वास नहीं..... क्या संभव है ?

ये कैसे हो सकता है की हम किसी से मोहब्बत तो करें पर उसका विश्वास ना करें.

हम जिस किसी से भी मोहब्बत करते हैं उस पर सहज ही विश्वास करने लगते हैं. यह एकदम   सामान्य सी बात है. ऐसा हो ही नहीं सकता की जिसे हम प्यार करें उसका विश्वास ही ना करें. असल में तो होता यह है की जब कोई व्यक्ति हमें अच्छा लगने लगता है तब हम उसकी हर अच्छी बुरी बात को भी पसंद करने लगते हैं और विश्वास करना इसी पसंद करने वाली भावना का अगला पढ़ाव होता है.

इसका अर्थ यह हुआ की ये कहना बिलकुल गलत है की प्यार  करो पर विश्वास नहीं. ऐसा हो नहीं सकता. 

वैसे क्या कुछ ऐसा हो सकता है की आदमी किसी पर विश्वास तो करे पर उससे मोहब्बत ना करे..... हाँ ऐसा तो हो सकता है की हम किसी व्यक्ति की बातों का विश्वास तो करें पर उससे प्यार ना करें.

तो क्या ऐसा भी हो सकता है की किसी व्यक्ति से हम घृणा करे  पर  उसका विश्वास भी करें. ...... शायद ऐसा नहीं हों सकता ... हम जिससे घृणा करेंगे उसकी बातों पर विश्वास तो कभी नहीं करेंगे.

अच्छा अगर हम साधारणतः जिस व्यक्ति से मोहब्बत करते हैं उस पर विश्वास ना करें तो क्या इसका कुछ फायदा होगा?

फायदे तो इस बात में बहुत हैं. उदहारण के लिए ..........

एक लड़की एक लड़के से मोहब्बत करती है. लड़का उसे अकेले में मिलने के लिए बुलाता है. चूँकि लड़की लड़के से मोहब्बत के साथ साथ  विश्वास भी करती है अतः उससे मिलाने के लिए अकेले चली जाती है और वहां लड़का आपने दोस्तों के साथ मिलकर लड़की से बलात्कार करता है. तो अपने विचार के अनुरूप यदि मोहब्बत विश्वास के बिना होती तो बलात्कार नहीं होता.

डिस्कवरी चेंनेल पर अंग्रेज पति फूट फूट कर रोता है. जिस पत्नी को प्यार किया और जिसका विश्वास किया वो बेवफा निकली. उनके बच्चों का पिता कोई और ही था. बन्दे का दिल टूट गया.  

आप आपने भाई से मोहब्बत करते हैं आप उस पर विश्वास भी करते हैं पर किसी दिन आपको पता चलता है की आपकी सारी संपत्ति उसने हथिया ली.

जनाब को  बेटे से बड़ा प्यार था और उस पर विश्वास भी बहुत था एक दिन पता चला की बेटा बुरी संगत में पड़ कर अपराधी बन गया.

तो क्या कहने वाले की बात सही है की प्यार करो पर विश्वास नहीं

और क्या यह संभव है की हम किसी से सिर्फ प्यार करें उस पर विश्वास नहीं?

ऑफिस में एक बंधू ने यूँ ही बातों बातों में विचार उछाला की मोहब्बत करो पर विश्वास ना करो. सारा ऑफिस उनका विरोधी हो गया. स्त्रियों ने इस विचार का सबसे ज्यादा विरोध किया. उन लोगों का मत था की विश्वास नहीं तो मोहब्बत नहीं. इस विचार के मुखर विरोधियों में से बहुत से ऐसे थे जिनके बारे में मुझे व्यक्तिगत रूप पता है की वो अपने प्रेमियों से विश्वासघात करते हैं. अतः मुझे इस विचार के पक्ष में आना पड़ा. वैसे भी अपनी हमेशा से "मां सेव्यं पराजितः" वाली मानसिकता रही है. मैंने आपने तर्क और कुतर्क लगा कर किसी तरह से बंधू की इज्जत बचायी. मामला वहीँ ख़त्म हो गया पर विचार मेरे मन में अटका ही रह गया.

41 टिप्‍पणियां:

  1. भावुकता से परे हट कर देखें तो ...
    प्यार करे ...मगर विश्वास सोच समझ कर ...
    जो वातावरण बना हुआ है देश में , समाज में ...यही ठीक है

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  2. विचार शुन्य तो हो ही नहीं सकते आपकी इस पोस्ट के बाद ..........विचार तो आते ही जा रहे है !

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  3. जब हम किसी को पसन्‍द करते हैं या प्‍यार करते हैं तब स्‍वाभाविक रूप से उस पर विश्‍वास भी करते हैं। लेकिन जब कोई रिश्‍ता हमें धोखा दे देता है तब लगता है कि सावधान रहना चाहिए था। किस पर विश्‍वास करें और किस पर नहीं इस चक्‍कर में रिश्‍ते नहीं बन पाते। इसलिए विश्‍वास करो और लेकिन प्‍यार में अधे मत बनो।

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  4. ajit gupta जी की बात से सहमत हूँ , प्यार करो और विश्वास भी करो लेकिन प्यार में अंधे मत बनो , अपनी अक्ल का दरवाज़ा भी खुला रखो

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  5. Gar pornubhav bura ho to,to wishwas aur pyar dono hone me kaafee samay lag jata hai..jabtak tak wishwas nahi hota wo pyar nahi kahla sakta,kewal aakarshan!Bhai-bahan kee baat farq hai.Wahan gar bhai daga de to wah bhayankar wishwasghat hoga!

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  6. आप कुछ भी कहें प्रेम और विश्वास एक ही सिक्के के दो पहलू हैं !जहाँ विश्वास खत्म हुआ प्रेम का नामोनिशान मिट जायेगा !

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  8. विचारी जी लाइफ बेसिक कंसेप्ट पर सवाल पूछ पूछ कर सबके कंसेप्ट क्लीयर कर रहे हैं , अच्छा है :)
    हमारा उत्तर यह है की "पहले विश्वास करें बाद में प्यार "
    इसमें एक बात और जोड़ना चाहूँगा भविष्य में क्या विश्वास घात होगा या नहीं ये तो इश्वर पर छोड़ना पड़ेगा
    अभी मेरे एंटीवायरस पर मुझे भरोसा था पर मैंने पाया की इसके होते हुए कुछ अनजान प्रोसेसेस मेरे कंप्यूटर में चल रही हैं
    मतलब वायरस आ गया है , पर इसमें एंटीवायरस की गलती नहीं है वायरस ही नए बन रहे हैं
    इससे मेरा उस एंटी वायरस के प्रति प्रेम कम नहीं हो जाता

    @ किसी व्यक्ति से हम घृणा करे पर उसका विश्वास भी करें
    इसमें मुझे संदेह है , घ्रणा जिससे हम करते हों ये जरूरी नहीं की उस पर विश्वास न करें , क्योंकि हम जिस बात से उससे घ्रणा करते है हमें ये विश्वास होता है की ये वो कार्य तो करेगा ही ...तभी तो हम घ्रणा करते हैं
    जरूरी नहीं की घ्रणा की वजह से अविश्वास हमेशा हो [कभी कभी ये भी देखा जाता है की सच्चे व्यक्ति से उसकी सच्चाई की वजह से ] घ्रणा की जा रही हो और ये भी संभव है की की के लिए घरना का पात्र हो वो कईं लोगों के लिए विश्वास का

    हम सब सुनते आ रहे हैं " पहले इस्तेमाल करें फिर विश्वास ..." ये भी अच्छा फोर्म्युला है खरीददारी में भी और रिश्तेदारी में भी
    यहाँ इस्तेमाल से आशय है कुछ वर्चुअल परिस्थितियाँ बनाने से है जिससे आप किसी को टेस्ट कर पायें
    आगे तो इश्वर मालिक .............. कंप्यूटर में प्रोसेसर मदर बोर्ड कितना भी अच्छा हो एक रेम गलत लग जाये तो परिणाम बदल जाते हैं

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  9. [सुधार] संभव है जो किसी के लिए घ्रणा का पात्र हो वो कईं लोगों के लिए विश्वास का [सुधार]

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  10. बडा कठिन प्रश्न और उसका उत्तर उससे भी ज्यादा कठिन्।
    आज के वक्त मे प्यार और विश्वास दो अलग अलग पहलू बन गये हैं अब सिर्फ़ प्यार और सिर्फ़ विश्वास के सहारे ज़िन्दगी नही गुजारी जा सकती …………हमने तो यही पढा था कि विश्वास करो मगर अंधविश्वास नही ……………अंध विश्वास मे धोखा मिलता है मगर विश्वास मे नही …………और जहाँ तक प्यार की बात है तो सब सिर्फ़ अपने अपने मतलब से ज्यादा प्यार करते हैं …………शायद इसीलिये अंधविश्वास नही करना चाहिये।

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  11. हम किसी से प्यार करे पर उसका विश्वास ना करे संभव है माँ अपने शरारती बच्चे से बहुत प्यार करती है पर यह जानती है कि वो शरारती है तो वो उस पर विश्वास नहीं करती और एक शराबी या झूठ बोलने वाले या फ्लर्ट करने वाले या इस तरह के किसी भी बुराई से ग्रस्त किसी अपने से हम प्यार तो करते है पर उस पर विश्वास नहीं करते क्योकि हम उसकी बुराई को जानते है | उसकी इनबुराईयो से हम उससे प्यार करना तो बंद नहीं कर सकते क्योकि ये दिल का मामला है और जो थोडा बहुत भी दिमाग रखते है वो विश्वास करने के मामले में दिमाग का स्तमाल करते है इसके लिए धोखा खाने कि जरुरत नहीं है | धोखा वो खाते है जो अन्धविश्वास करते है |
    हम किसी से नफरत करे पर उस पर विश्वास भी करे यह भी संभव है | दो ईमानदार व्यक्ति कि एक दुसरे से जाती दुश्मनी हो तो वो एक दुसरे से नफरत तो करेंगे पर विश्वास भी करेंगे क्योकि उन्हें पता है कि वो दोनों इंसानी तौर पर ईमानदार है और आपस के मामले के अलावा अन्य मामलो में ईमानदार रहेंगे | और यदि हम नफरत करने वाले को अच्छे से जानते हो तो यह विश्वास भी रहता है कि वो क्या कर सकता है और क्या नहीं |

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  12. तुम्हारा मुझे पर अटूट विश्वास
    की मुझे से नहीं होगा
    तुम्हारा कोई अनीष्ट
    मुझे बनता है सशक्त
    और मै अपने मन की
    हर इच्छा को जीतती हूँ
    ताकी ऊपर उठ सकू
    भूल सकू अपनी ज़रुरतो को
    प्यार नहीं विश्वास हूँ मै तुम्हारा
    क्योकि प्यार के बिना तो रहा जा सकता है
    पर विश्वास के बिना
    जीना व्यर्थ है
    http://mypoemsmyemotions.blogspot.com/2007/05/blog-post_137.html

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  13. मेरा बिचार थोडा भिन्न है पाण्डेय जी , मैं कहता हूँ कि बिना तोले-परखे आप मुह्हबत ही क्यों कर बैठते हो ? कमी आपमें है , उस धोखेबाज में नहीं हो कहीं एकांत में आपको बुला रहा है !

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  14. विचारणीय आलेख (और शीर्षक भी सही)
    हमारे एक मित्र को भी एक बन्दरिया से प्यार था मगर विश्वास नहीं किया इसलिये वह कभी उन्हें काट नहीं सकी। काट लेती तो कुछ विद्वान उनमें ही कमी निकालते जैसे किसी के घर पर पडोसियों के कब्ज़े के बाद कुछ लोग (परदेस में नौकरी करते) घर के मालिक पर ही दोशारोपण कर रहे थे।

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  15. मुझे तो अंशुमाला जी के विचार बडे संतुलित लगे ! और हाँ मैं विश्वास के बिना तो जी लूंगा पर प्रेम के बिना एक सेकंड भी नहीं :)

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  16. हाँ... यह बात तो सही है ... यहाँ मौजूद कमेंट्स में अंशुमाला जी का कमेन्ट सबसे संतुलित नजर आ रहा है
    ऐसे कमेन्ट ही किसी पोस्ट को सही मायनों सफल बनाते है

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  17. बन्धु, इतना लोड मत लिया करो यार ऑफ़िस में, हा हा हा।
    पोस्ट को कमेंट्स ने और रोचक बना दिया है। बाद में आने का ये फ़ायदा है, अलग अलग विचारधारायें देख पात हैं।

    लगे रहो दोस्त।

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  18. एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !

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  19. विश्वास, प्रेम, घृणा ये ऐसे मनोभाव हैं...जो व्यक्ति पैदा नहीं करता । ये तो व्यक्ति की सोच और उसकी प्रकृति के अनुरूप उसमें घटित होते हैं । जैसे हमने सुंदरता के पैमाने बनाए हैं...उस तरह से विश्वास,प्रेम और घृणा के पैमाने नहीं बना सकते । ये या तो होते हैं या नहीं होते । ये जबरदस्ती किसी में पैदा नहीं किए जा सकते । एक ही व्यक्ति किसी के लिए बहुत विश्वसनीय होता है तो दूसरे के लिए अविश्वसनीय । लेकिन इससे उस व्यक्ति की सत्ता में कोई परिवर्तन नहीं आता । प्रकृति ने हर इंसान को अद्वितीय बनाया है । उसमें कॉमन चीज़ ढ़ूँढ़ना उसकी सत्ता का अपमान है । यह बात अलग है कि लोग विश्वास,प्रेम और घृणा के पैमाने निश्चित कर लेते हैं और उनके अनुसार लोगों का मूल्यांकन कर लेते हैं । जब कोई विश्वास टूटता है तो लोगों के मूल्यांकन के पैमाने खंडित होते हैं ...न कि विश्वास,प्रेम और घृणा जैसे मनोभाव ।

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  20. बिना विश्वास के क्या सच्चा प्यार संभव है - शायद नहीं।

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  21. यदि प्यार सच्चा है, तो विश्वास तो स्वतः ही होगा. अब यदि कोई विश्वासघात करता है तो ऐसा करने वाला प्यार नहीं करता प्यार का दिखावा करता है .
    आपका यह तर्क कि जिससे घृणा करते हैं उस पर तो विश्वास हो ही नहीं सकता, से मेरी सहमति नहीं बन पा रही है. हम किसी से किसी कारण विशेष को लेकर घृणा करते हैं,उस कारण को छोड़ दें तो अन्य मुद्दों पर वह विश्वास योग्य हो सकता है.

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  22. .
    विश्वास करना और धोखा खाना, अपनी तो यही नियति है।
    .

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  23. Divya जी
    इतना निराशाजनक कमेन्ट ???

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  24. .
    गौरव जी,
    कुछ क्षेत्रों में सदैव ही हार हुई है, इमानदारी से कबूल कर रही हूँ।
    .

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  25. @दिव्या जी

    क्या हार की यादें कभी कभी इतनी सजीव हो उठतीं हैं ??
    यादें ही तो हैं, या मन इन्हें बार बार याद कर और इन्हें सजीव कर परेशान कर रहा है ???

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  26. कहने का मतलब है
    हारे हुए (या ऐसा मानने वाले)इंसान के विचारों में जीते हुए इंसान की अपेक्षा अधिक सही दिशा, और सच्चाई देखने को मिल सकती है

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  27. VICHAAR SHOONYA जी
    आप कहते है की आम मुस्लिम इतना कट्टर नहीं है ,ठीक है अगर आप की बात मान भी ले तो आप ये बताने का कष्ट करे की फिर पाकिस्तान का निर्माण क्यों हुआ और वो भी १६ अगस्त १९४६ को मुस्लिम लीग के प्रत्यच्छ कार्यवाही दिवस में हजारो हिन्दू मारे जाने के बाद .
    कश्मीर से कश्मीरी पंडित क्यों निकाले गए और अब क्यों सिक्ख धमकाए जा रहे है .
    क्यों मुस्लिम इलाकों में पाकिस्तान का झंडा लहरा दिया जाता है और अफजल गुरु को फासी देने पर पूरे देश में दंगे करने की धमकी देते है .
    आजादी के समय अल्पसंख्यक हिन्दू कहा गए पाकिस्तान में , हैदराबाद को पाकिस्तान में मिलाने की माग क्यों करते है .भारत ने इन्हे क्या नहीं दिया पर ............
    जहा पर ये अल्पसंख्यक है वहा पर धर्म निरपेछ और जैसे ही बहुसंख्यक हुए सरीयत के हिसाब से . आप कुछ दिन मुस्लिम बाहुल्य इलाके में रहिये और फिर बताईये .
    शतुरमुर्ग की तरह गर्दन रेत में गाड़ लेने से खतरा नहीं टल जाता
    जन को जाग्रत करने का जो कार्य शर्मा जी कर रहे है वह न केवल अनुकरणीय है बल्कि वन्दनीय भी है .
    यदि हमने अतीत से सबक न लिया तो भविष्य हमें कभी माफ़ नहीं करेगा .
    हमारी उदारता को कायरता समझा गया है इस लिए अब इन को इनकी ही भाषा में समझा रहे है .

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  29. मुझे छमा कीजियेगा जो मैंने आप जैसे सज्जन व्यक्ति को पहचानने में भूल की और आप की बात को दूसरे अर्थ में ले लिया .
    प्यार किया जाये और विश्वास नहीं ये संभव है वर्ना पत्नी कभी अपने पति पर श़क न करती .
    और जहा विश्वास है वहा प्यार हो ऐसा भी जरुरी नहीं है . व्यापार में करोडो के लेन देन सिर्फ विशवास पर होते है प्यार वहा लेश मात्र भी नहीं होता

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  30. कभी कभी न चाहते हुए भी हम किसी पर यूँ ही विश्वाश करने लगते हैं और अक्सर ऐसे निर्णय सही साबित होते हैं...विश्वाश घात वो ही करते हैं जिन पर हमें विश्वाश होता है...आपका लेखन बहुत प्रभाव शाली है...बहुत अच्छा लगा आपकी पोस्ट्स पढ़ कर...
    नीरज

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  31. विश्‍वास बनाए रखने के लिए सवाल और विचारों के साथ प्रतिक्रिया स्‍वाभाविक है, प्रेम और विश्‍वास की गतिशीलता और सक्रियता ही तो उसे जीवन्‍त रखती है, वैसे मनुष्‍य पत्‍थर की मूरत को भी सवाल के कटघरे में खड़ा कर देता है.

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  32. "Bikhare sitare pe" aapka shukriya ada kiya hai,aapki dee tippanee ko leke.."In sitaron se aage 4",is post pe zaroor gaur karen..

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  33. Apki tarah hi main bhi nahin samajh nahin pa rahi hun ki pyar me vishwas kiya jay ya vishwas hone ke baad pyar....... bada umda prashna uthya hai apne.....ajkal kai ghatnaye aisi bhi hoti hainjinme na pyar nazar aata hai na vishwas......

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  34. क्या यह संभव है की हम किसी से सिर्फ प्यार करें उस पर विश्वास नहीं?
    ....फिर वह प्यार नहीं कुछ और है....
    ________________
    'शब्द सृजन की ओर' में 'साहित्य की अनुपम दीप शिखा : अमृता प्रीतम" (आज जन्म-तिथि पर)

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  35. मेरा मानना है कि जब तक किसी पर अविश्वास करने का कोई कारण न हो, तब तक नहीं करना चाहिये... प्रेक्टिकल दुनिया में शायद ये सही न हो, किन्तु कम-अज़-कम मेरे मन में शान्ति रहती है...

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  36. कोई नयी खोज नहीं चल रही है क्या विचारी जी?? :))
    नया लेख कब आएगा ?? :)

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  37. Main bhi Ajit ji se sahmat Hu kyo Ki ye mera personal experience raha hai....pyar jab Kisi se hota h to vishwas alag se nahi jagaya jata wo apne aap hi hone lagta hai par iska ye mtlb nhi Ki ham apni aankhe hi bnd Kr le or sahi galat ko hi na pahchan paye

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