रविवार, 15 दिसंबर 2013

खजुराहो, कृष्ण, अर्जुन और समलैंगिकता

टी वी पर हो रही बहसों में अक्सर मैंने यह देखा है कि अगर आप मकबूल फ़िदा हुसैन द्वारा बनाये दुर्गा और भारत माता नग्न चित्रों का समर्थन करते हों, या समाज में तेजी से बढ़ रहे बिना विवाह युवक युवतियों के घर बसा लेने वाले  नए चलन के हिमायती हों, या विलायती संत वेलेंटाइन के दिवस पर युवा वर्ग द्वारा खुले आम प्रेम प्रदर्शन को सही ठहराते हों या भारतीय समाज में समलैंगिकता को सम्मानजनक दर्जा दिलाना चाहते हों तो मान लीजिये कि खजुराहों के मंदिर आपके इस जन्म के तारणहार हैं। अगर कोई भारतीय परम्पराओं का समर्थक आपसे बहस करे तो उसके  ऊपर खजुराहो नामक बम फोड़ दीजिये आपकी जीत सुनिश्चित है। और फिर भी कुछ बचा रहे तो कामसूत्र के सूत्र से उसका गला घोट दीजिये।

कल डाक्टर दराल sahab के ब्लॉग par देखा कि समलेंगिकता के समर्थन में कृष्ण, अर्जुन और शिखंडी को भी खीच लाया गया है । मुझे समझ नहीं आया कि समलेंगिकता और कृष्ण या अर्जुन के बीच कहाँ का साम्य है।
मुझे तो इन लोगों कि हाय तौबा भी समझ में नहीं आती। क्या कुछ आकड़े मौजूद हैं कि पुलिस वाले कितने लोगों को समलेंगिकता (धारा ३७७ ) के अपराध में जेल में बंद करते हैं। कल ही मैंने दिल्ली पुलिस के एक सब इस्पेक्टर से पूछा तो उसने बताया कि अपनी सैंतीस साल कि नौकरी में उसने धारा ३७७ में एक भी आदमी या औरत को नहीं पकड़ा। चारों  तरफ सम्लेंगिक और उनके समर्थक इस तरह से व्यव्हार कर रहे हैं मानो सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से इन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ेगा और अब सारे समलैंगिकों के शयनकक्षों में पुलिसवाले जाकर पहरा देने लगेंगे।

असल में धारा ३७७ पर सुधार  के बहाने सम्लेंगिक अपने अप्राकृतिक असामान्य व्यव्हार को सामाजिक स्वीकृति दिलवाना चाहते हैं जो होना नहीं चाहिए। इस विषय में तो मैं चाहता हूँ कि यदि  धारा ३७७ में सुधार करके सहमति से बनाये अप्राकृतिक यौन सम्बन्धों को सजा योग्य अपराध श्रेणी से हटाया जाता है तो साथ में एक बात अवश्य जोड़ी जानी चाहिए कि समलेंगिकता का सार्वजनिक प्रदर्शन सजा दिए जाने योग्य अपराध होगा। क्योंकि एक बार अगर इन्हे क़ानूनी स्वीकृति मिल गयी तो इन लोगों ने प्यार के इजहार के नाम पर ऐसी गन्दगी फैलानी है कि सम्हालना मुश्किल हो जायेगा। समलेंगिकता एक मनो विकृति है जिसकी सामाजिक स्वीकृति आने वाली पीढ़ियों को विकृत ही करेगी।

24 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसे मुद्दे ही अब राष्ट्रीय मुद्दे हैं, हद है यार।

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  2. मुद्दे का एक पक्ष यह भी है जिसका भरपूर आदर होना चाहिए

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  3. http://indianhomemaker.wordpress.com/2013/12/13/would-this-crime-have-been-reported-if-he-had-mercilessly-raped-her-but-not-sodomised-her/

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  4. http://indianhomemaker.wordpress.com/2013/12/13/would-this-crime-have-been-reported-if-he-had-mercilessly-raped-her-but-not-sodomised-her/

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  5. ये जानते हुए भी कि आप को समझाना मुश्किल है फिर भी अपनी तो आदत है कि हम चुप नहीं रहते सो ,खजुराहो का नाम तब लिया जता है जब ये कहा जाता है कि ये पश्चिम की अवधारणा है उसकी नक़ल है इसलिए तमाम उदाहरण दे कर ये बताया जाता है कि जो लोग ये गलतफहमी पाल कर रखे है कि ये भारत में नहीं था तो कम से कम वो इस गलतफहमी को दूर कर ले बाकि अपने विचार कुछ भी रखे । कुछ समय पहले तक ये अपराध था फिर भी एक भी व्यक्ति को नहीं पकड़ा गया जबकि सभी को पता था की कौन कौन से सेलेब्रेटी गे है इसका मतलब ये नहीं की कुछ फर्क नहीं पड रहा था , असल में लोगो को जेल में नहीं डाला जा रहा था लोगो से इसके नाम पर अवैध वसूली की जा रही थी जैसा कि पुलिस हमेसा करती है अपराध का पता लगाती है ताकि अपनी जेब भरी जा सके न कि अपराधी को पकड़ा जा सके , निश्चित रूप से आप को इसकी जानकारी नहीं होगी ,मुम्बई में कुछ साल पहले बिच सड़क पर एक पुलिस वाले ने पुलिस बिट में एक नाबालिग लड़की से रेप किया था उस केस में उसने लड़की को एक लडके के साथ पकड़ा उन्हें अश्लील व्यवहार करने के जुर्म में धमकाया और पैसे की मांग की लडके को पैसे लेने के लिए भेजा और अकेली लड़की के साथ रेप कर लिया , उसके बाद पता चला की सार्वजनिक रूप से अश्लीलता रोकने के नाम पर कैसे पुलिस पैसा उगाहती है , ये आरोप कई समलैंगिक लोग लगाते रहे थे और उसी से बचने के लिए धारा ३७७ को कोर्ट में चुनौती दी गई थी , और कहा गया कि आप भले इसे मान्यता न दे किन्तु अपराध की श्रेणी से बाहर निकाले ताकि पुलिस उन्हें परेशांन करना बंद कर दे , वो किसी के जीवन में दखल नहीं दे रहे है । जब कोर्ट ने पहले ३७७ को गलत कहा था तभी साफ किया था कि इस मामले में भी वो सारे कानून लागु होंगे जो किसी महिला या पुरुष के सम्बन्धो में लागु है जैसे रिश्ता आपसी सहमति से बनना चाहिए , दोनों को बालिग होना चाहिए डरा धमका कर , धोखा दे या आप ये नहीं कर सकते है और न ही सार्वजनिक रूप से इसका प्रदर्शन कर सकते है , निश्चित रूप से इस बात की भी जानकारी आप को नहीं थी ।

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  6. वैसे जिस तरह आप ने मेरी पोस्ट पर ये कहना चाहा कि पुरुष और स्त्री का जन्म केवल शारीरिक जरुरतो को पूरा करने के लिए हुआ है वो दोनों एक शिकारी की तरह शिकार खोजते है अपनी जरुरतो के लिए , ९९% पुरुष बलात्कारी होते है ,और जैसे दुसरो के ताप नापने से गर्मी आप में बढ़ जाती है मुझे आप कि ये सोच और व्यवहार भी बढ़ी आप्रकृतिक और असामान्य और डरावनी लगी , किन्तु हम दो अलग इंसान है और अपने विचार रखने के लिए और उस हिसाब से जीने के लिए स्वतंत्र है ,एक दूसरे पर अपनी बात मानने के लिए मजबूर नहीं कर सकते है जबकि , आप जैसे विचार सभी पुरुषो के हो जाये तो ये हम स्त्रियो के लिए एक खतरनाक बात होगी और ये हमारे और हमारी बेटियो के लिए एक असुरक्षित समाज का निर्माण करेगा जहा पर रेप जैसे व्यवहार को प्राकृतिक बेलॉजिकल कहा जाये ।

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    1. "फेमिनिस्ट" लोगों की यही परेशानी है की मुद्दे को कैसे भटकाया जाये, यहाँ बात समलैंगिकता की हो रही थी और आपने तो सारे पुरुषों को ही बलात्कारी बना दिया | ये लेख पढ़ के यदि आपको यही समझ आया की स्त्री और पुरुष केवल शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए हैं तो आपकी सोच ही ख़राब हैं |
      भारत की विशेषता ये रही है की हज़ारो वर्षो से यहाँ कई प्रकार की धारणा रखने वाले लोग रहे हैं, उनमें से एक धारणा ये भी थी की स्त्री और पुरुष को शारीरिक सम्बन्ध केवल वंश वृद्धि के लिए बनाना चाहिए, अपनी शारीरिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नहीं | जहाँ तक समलैंगिक लोगों की बात है, मुझे नहीं लगता उनका वंशवृद्धि से कोई लेना देना है, समलैंगिक सम्बन्ध तो " केवल शारीरिक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए" बनाए जातें हैं ,"वो लोग शिकारी की तरह शिकार खोजते है अपनी जरुरतो के लिए" | इससे तो यही साबित होता है की ९९% समलैंगिक बलात्कारी होते हैं (यही तर्क हैं न आपका ?)

      "९९ % पुरुष बलात्कारी होते हैं", चलिए थोड़ी देर के लिए ये भी मान लेते हैं, लेकिन आपके पास कोई प्रमाण है ? आपको कैसा लगेगा यदि कोई पुरुष ये कह दे की "९९ % स्त्रियां चरित्रहीन होती हैं " या "९९ % स्त्रियां बुद्धिहीन होती हैं"?

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  7. कुंती कृष्ण कि बुआ थी , अर्जुन कुंती के पुत्र , सुभद्रा कृष्ण कि बहिन , इस नाते अर्जुन और सुभद्रा का विवाह भाई बहिन का हुआ { जानती हूँ अर्जुन का जन्म कैसे हुआ } पर कुंती के पुत्र होने के नाते वो सुभद्रा के भाई ही हुए। ये सब पात्र काल जायी हैं और इन पर हैं पर भारतीये संस्कृति कि बात होने पर प्रश्न उठते हैं

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  8. आपने सही लिखा है। समस्‍या यह है कि ज्‍यादातर को (इनमें ये भी हैं जिन पर आपने लिखा है) बिना कुछ किए धरे ही खाना-पानी मिल रहा है। इन को चार दिन भूखे रखो अकल ठिकाने आ जाएगी।

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  9. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  10. पांडेय साहब मैं आप को सबसे बेहतर ब्लॉगर्स में से एक इसीलिए मानता हूँ की आप हर बात बिना लाग लपेट के (फर्जी आदर्शवाद या कोई अन्य वाद से प्रभावित हुए बिना) एक आम आदमी की भाषा में ईमानदारी से बयान कर देते हैं ..

    अगर आपको ध्यान हो मैने पहले भी कहीं उदाहरण दिया था एक फिल्म का जिसमें माँ को सिर्फ़ ग़लत फ़हमी होने पर की उसके बेटी लेस्बियन है उसकी उदारवादी सोच की हवा निकल जाती है, वो रो रो कर आसमान सर पर उठा लेती है और ग़लतफहमी दूर होते ही वही आडंबर युक्त उदारवादी सोच दोबारा ओढ़ लेती है

    रही बात सर्वाधिक प्रचलित खजुराहो के कुतर्क की तो लोगों को ये खुद ही समझना होगा की क्या सच में खजुराहो भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है?

    सेक्सुअल बिहेवियर और उसकी वैधता से उसको मिलने वाले बढ़ावे को आप यहाँ पढ़ सकते हैं

    One example of situational sexual behavior includes when people might not have sex with prostitutes in their home countries, but may do so when they visit other countries, where such activities are legal or ignored by authorities. Another example is when individuals or members of a community might engage in homosexual behaviors but identify as heterosexual otherwise, such as some people in prison, the military, single sex boarding schools, or other sex-segregated communities.

    http://en.wikipedia.org/wiki/Situational_sexual_behavior

    जहाँ तक बात सहमति शब्द की है किसी की सहमति (जो वर्तमान में है) उसके इतिहास में ज़ोर ज़बरदस्ती भी हो सकती है, ये बात समझने मे लोगों को टाइम लगेगा | इसके अलावा कितने लोग शिकायत दर्ज करवाएँगे ये भी एक प्रश्न चिन्ह है

    वैसे अगर इसे वैध करार दे दिया जाता तो शायद अब से कुछ सालों बाद इसे भी भारतीय संस्कृति के नाम पर प्रचार कर दिया जाता |

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  12. बहुत सही कहां।
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  14. समलैंगिकता एक सामाजिक विकृति है - पूर्णतः सहमत ।

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