सोमवार, 22 फ़रवरी 2010

बेदर्द बुडापा.

आज सुबह एक पुराने परिचित से काफी समय बाद मुलाकात हुई। उनमे मुझे वृद्धावस्था के चिन्ह दिखाई पड़े। अचानक मुझे आदरणीय नारायण दत्त तिवारी जी का स्मरण हो आया । वास्तव में बुडापा पुरुष को लचर, कमजोर व् असमर्थ बना देता है। कमजोर, असमर्थ पुरुष ही परेशानियों के जाल में जा फसता है। अन्यथा जिस कृत्य को शायद आदरणीय तिवारी जी सारी जवानी भर करते आए वह बुड़ापे में ही जी का जंजाल क्यों बनता।
भला हो हमारी भारतीय संस्कृति का की हम वृद्ध लोगों का सम्मान करना जानते हैं और उनके आचरण पर उंगली नहीं उठाते।इसी मर्यादित संस्कृति की वज़ह से ही आदरणीय तिवारी जी के इस कृत्य पर हमारे राजनेताओं, राजनेतिक दलों तथा मीडिया ने ज्यादा बबाल नहीं मचाया और मुद्दा अपनी मौत खुद ही मर गया। वैसे आदरणीय तिवारी जी के चरित्र पर पहेले से ही किसी को शक नहीं था तभी तो एक युवक द्वारा उन्हें अपना पिता ठहराने का मामला भी फूस ही साबित हुआ। शायद बहुत से युवक हों जो तिवारी जी को अपने पिता तुल्य मानते हों।
वैसे मैं वक्तिगत रूप से आदरणीय तिवारी जी की इस बात से पूरी तरह से सहमत हूँ की यह मामला उनके निष्कलंक और पवित्र जीवन को बदनाम करेने का एक षड़यंत्र ही है। अब इन नोज़वानो को क्या पता की बुढ़ापे में आदमी कमजोर हो जाता है। उसकी कमजोरी की वजह से ही अक्सर उसकी पैंट या उसका पायजामा उतर जाता है। गलती तो पायजामे की है जो यह नहीं देखता की कब उतरना है और कब नहीं।

ये कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। तिवारी जी एक बड़े नेता रहे हैं। उनके कद के पुरुष के लिए यह एक छोटा सा लांचन भर है वरना एक समय था की तिवारी जी भी आदरणीय बाजपेई जी की ही तरह प्रधानमंत्री पद को सुशोभित कर सकते थे पर जरा सी चूक की वजह से उन्ही की तरह आदरणीय राव साहब प्रधानमंत्री पद पर सुशोभित हुए।
सारांश यह है की हमें अपने वृद्ध लोगों का आदर सम्मान करना चाहिए और उन्हें उनके स्वास्थय का ख्याल रखने का पूरा समय देना चाहिए। उन्हें बुड़ापे में उनकी जवानी से चली आ रही आदतों के लिए अपमानित नहीं करना चाहिए। पकड़ना है तो उन जवानों को पकड़ो जो अभी इसे शौक पाले हुए हैं ताकि वो बुड़ापे में अपना मानसिक व् शारीरिक स्वास्थय उत्तम रख सके और उन्हें आदरणीय तिवारी जी की तरह गिरते स्वास्थय की वजह से इतने महत्वपूर्ण पद से इस्तीफा न देना पड़े।

2 टिप्‍पणियां:

  1. सुलझा हुआ चिंतन काबिले तारीफ़ है। आदरणीयों, सम्मानित जजों पर व्यंजना में कही गयी कटूक्तियाँ आपका व्यक्तिगत संस्कार है। इसीकी अपेक्षा रहती है वर्तमान में फैशन परस्त युवाओं से।

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