गुरुवार, 9 दिसंबर 2010

कपोत पलटदास ब्लॉग अवतारी




एक रहन कपोत पलटदास ब्लॉग अवतारी
करके आंख बंद मन मा जाने का बिचारी


तबही आई वहां एक नार शायद वो कुंवारी

देख कपोत भये चकित मति गयी उनकी मारी

 संवारना उसका देख कर सोच उनकी भयी बिकारी

लगे सोचने होगा ये......


और होगा वो........


पर........ फुर्र हो गयी वो नारी




और रह गए पलट दास ब्रह्मचारी के ब्रह्मचारी.
 





इति.

43 टिप्‍पणियां:

  1. यह क्या कपोतदास तो लंगडे है। एक पैर वाले।

    जवाब देंहटाएं
  2. अक्सर ऐसा ही होता है जब जबरदस्ती ग़लतफ़हमी पाली हो हा.... हा.... हा

    जवाब देंहटाएं
  3. अरे सुज्ञ साहब उसे लंगड़ा कह कर बेचारे का अपमान ना करें. वो ध्यान मग्न है. याद करें अपने ऋषि मुनि इस पोज में ही ध्यान लगाते थे. :)

    जवाब देंहटाएं
  4. ये पोस्ट कपोतदास के मानवाधिकारों का हनन है :))

    जवाब देंहटाएं
  5. scientific-evidence-reincarnation

    http://my2010ideas.blogspot.com/2010/12/scientific-evidence-reincarnation.html

    जवाब देंहटाएं
  6. लगता है अब बढ़ चुकी सक्रियता के चलते पलटदास जैसे लोग अब थोड़ा सतर्क हो जाएंगे :)

    बढ़िया।

    वैसे ये आपके घर के आसपास का ही दृश्य लगता है। तभी इतनी देर तक इस पलटदास को फिल्माते रहे :)

    जवाब देंहटाएं
  7. रह गए पलट दास ब्रह्मचारी के ब्रह्मचारी.

    फुर्र हो गयी वो नारी उसने दिखाई होशियारी

    क्योकि घर गृहस्थी बोझ है बड़ी भारी

    और एक टांग वाला पलट दास ना उठा पायेगा ये जिम्मेदारी :)))

    जवाब देंहटाएं
  8. यह अच्छी श्रंखला है...मामला क्या है ...?

    जवाब देंहटाएं
  9. ध्यान तो बेध्यान में दुर्ध्यान हो गया बंधु।
    लेकिन एक बात से परेशान हूँ,आपने कैसे निश्चित किया कि कपोत पलटदास ब्रह्मचारी ही रहा? ;)

    जवाब देंहटाएं
  10. बन्धु, मैथुनरत क्रौंच युगल में से नर क्रौंच की हत्या देखकर आदिकवि ने पहली कविता कही थी, ’मा निषाद प्रतिष्ठाम......’, दिख रहा है कि आप भी रचोगे कुछ न कुछ ऐसा ही:)
    कपोत महाराज गा रहे होंगे - मेरी बात रही मेरे मन में, और श्रीमान जी ने पोस्ट लिख मारी, अच्छा नमक छिड़का है गुरू। हमारी संवेदना, सहानुभूति कपोत पलटदास जी के साथ है।

    जवाब देंहटाएं
  11. शाश्‍वत वैचारिक शून्‍यता है जी, मामला क्या है ...? मेरे कबूतर का एक टांग ?

    लोकप्रिय-अतिलोकप्रिय-महालोकप्रिय व वरिष्‍ठ-कनिष्‍ट-गरिष्‍ठ ब्‍लॉगर

    जवाब देंहटाएं
  12. हा हा सतीश भाई की प्रस्तुति पर यह चित्रांकन गजब ढा गया !

    जवाब देंहटाएं
  13. संजीव जी से सहमत। हम तो डेढ़ टाँग वाले की उम्मीद लगाए थे :-)

    जवाब देंहटाएं
  14. अंदाज- ए- वयां गजब ..जिसको जो समझना है समझ लें ...शुक्रिया

    जवाब देंहटाएं
  15. आपके चित्रों से नहीं लग रहा है कि कपोत दास ब्रह्मचारी रह गए हैं ...
    दूसरी बात गौरव अगरवाल जी से कि यह मानवाधिकारों का नहीं कपोताधिकारों का हनन है ...
    by the way, इसमें नर कौन और मादा कौन है ... मतलब आजकल के युग में सबकुछ थोडा गोलमाल सा है न भाई ... इसलिए पूछ रहा हूँ ...
    मुझे तो एक टांग की कबूतरी लग रही है ...

    जवाब देंहटाएं
  16. कपोत बिचारे को का मालूम क्वोनो ब्लोगर उका इ हरकत नोट कर रहा है?

    बिचारे....... ब्लोगर्स ????

    कई हरकते नोट होती हैं, पर पता नहीं चलता.

    जवाब देंहटाएं
  17. आजकल के बाबाजी भी तो कुछ ऐसा ही कर रहे है...............पहले तो एक टांग वाला बगुला टाईप का ध्यान लगाते है............फिर चेले/चेली उनके शरणागत होते तो बाबाजी कुछ ऐसा ही झपट्टा तो मारते है चेले/चेलियों के धन/आबरू पर.................गजब की पत्रकारिता करे हो..............कपोत महाराज का सारा भंडा फोड़ स्टिंग औप्रेसन कर डाले हो बाबूजी :)

    जवाब देंहटाएं

  18. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

    जवाब देंहटाएं
  19. लो भाई एक पैर ऐसी ही हरकतोँ से गवाँ कर भी नहीँ चेँते , तो यही होगा

    जवाब देंहटाएं
  20. अमित भी जानते हैं इनको .....??

    जवाब देंहटाएं
  21. @ अमित भी जानते हैं इनको .....??
    # किनको !!! बाबा कपोत दास को ???? या विचारीजी को ???

    जवाब देंहटाएं
  22. बाबाजियों की बात कर रहें है तो ५/६ बाबाजियों की लुटिया डुबोयी है मैंने अपने गाँव में .................... विस्तार से कभी बताऊँगा

    जवाब देंहटाएं
  23. और विचारीजी की बात कर रहें है तो ब्लॉगजगत में स्नेह संप्रदाय के बाबाजी के रूप में पहला स्नेह प्रसाद इन्होने ही दिया था

    जवाब देंहटाएं
  24. अमित भैया, इस बाबा की लुटिया मत डुबो देना........

    जवाब देंहटाएं
  25. बहुत ही उम्दा प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  26. वाह क्या खूब,शब्दों के चित्र और चित्रों के शब्दों का मिश्रण यहाँ प्रस्तुत किया आपने...

    इन निरीह,निशब्दों कि भावनाओं को खूबसूरती से पेश ही नहीं किया बल्कि महसूस भी किया है!

    कुंवर जी,

    जवाब देंहटाएं
  27. जब हुई लाचारी
    तो बन गए ब्रह्मचारी।
    गिरे बीच गंगे
    बोले हरगंगे।

    जवाब देंहटाएं
  28. दीपक बाबा का कथन मेरा भी माना जाए अमित !

    जवाब देंहटाएं
  29. यही तो फर्क है मानव व पशु-पक्षियों में...यही फोटो किसी मानव के होते तो वो मानहानि का मुकदमा कर सकता था ....फिर भी अंदाज-ए-बयां अच्छा लगा....

    जवाब देंहटाएं
  30. विचार शून्य जी ,
    पहले से लेकर पांचवे नंबर के चित्र और उनके अर्थ बराबर हैं बस उससे आगे...

    छठवें चित्र में 'समय का संशय' है इसलिए यह कहना कठिन है कि कपोत मनमानी नहीं कर सका :)

    सातवें चित्र से तो यह भी लगता है कि उसे अगली की प्रतीक्षा है :)

    जवाब देंहटाएं
  31. @ विचार शून्य ,
    आप अनवर जमाल से सहमत हैं जानकर वाकई अच्छा लगा आपको मैं गंभीर गुरु की श्रेणी में रखता हूँ ...

    महाराज ,
    कभी कभी अपना मेल बॉक्स भी देख लिया करें ...एक चिट्ठी भेजी है, कम्पुतराइज जवाब मिल गया ...

    जवाब देंहटाएं
  32. आपने कपोत का निजी मुआमला सरे-बज्म उठाकर उसकी निजता का अतिक्रमण किया है...अगर उसने मुकद्दमा ठोंक दिया तो...????????????????...............!!!!!!!!!!!!

    जवाब देंहटाएं
  33. अब इस कपोत दास को कब तक दिखाओगे यार या इससे कुछ करार किया है :-))
    कुछ लिखो भाई आपके चाहने वाले आपके दरवाजे से खाली जा रहे हैं
    :-(

    जवाब देंहटाएं
  34. हम्म ..तो यहाँ भी नारी ने बाजी मारी...और कपोत ने मानी हारी....

    जवाब देंहटाएं
  35. मज़ा आया पढने मैं भी और चित्र तो बहुत ही बुलते हुए हैं..धन्यवाद्

    जवाब देंहटाएं